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शनिवार, 30 अगस्त 2025

समय की पीठ

 कहीं कोई खलल है

कोई कुछ शोर 

कहीं कोई दूर चौराहे पर

फटे वस्त्रों में 

चुप्पी में है। 

अधनंग भागते समय 

की पीठ पर 

सवाल ही सवाल हैं।

सोचता हूं

सवाल और खामोशी 

क्या एक जैसे होते हैं ?

नहीं नहीं

सवाल जब खामोशी में समा जाते हैं

तब समय की पीठ लहुलहान हो उठती है

और 

खामोशी जब सवाल बनती है

गहरे जख्म और गहरे होते जाते हैं।

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 कहीं कोई खलल है कोई कुछ शोर  कहीं कोई दूर चौराहे पर फटे वस्त्रों में  चुप्पी में है।  अधनंग भागते समय  की पीठ पर  सवाल ही सवाल हैं। सोचता ह...