1.
हम छोटे हैं
बहुत छोटे
तब जानते हैं
जब हम बडे़ हो जाते हैं
2.
जीने के लिए रोज
हम सीते हैं
पूरा दिन अपने आप को
फिर
उधड़ जाते हैं अगली सुबह।
3.
एक कदम
दूसरा कदम
तीसरा कदम
चौथा भी
फिर कोई कदम नहीं।
4.
पेड़ पर घोंसला
लटका रहा पूरे साल
पक्षी लौटा
और
टूट गई घोंसले वाली वो डाल।
5.
चीख अक्सर
भयभीत करती है
लेकिन
अंदर ही अंदर
हर बार कुछ टूटता है
बिना शोर के।
संदीप कुमार शर्मा
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