आज पक्षियों
जीवों
वन्य जीवों
कीटों, तितलियों की
आपात बैठक बुलाई गई।
जंगल का राजा
थर-थर कांप रहा है
सभी को सामने देख।
बार-बार कई बार
हिचकी ले रहा है।
इस रात
जंगल खामोश है
राजा खामोश है
केवल इतना ही कह पाया
दोस्तों
कल यह जंगल हमारा नहीं होगा।
माफ करना
किसी का नहीं होगा
अरे
जंगल ही नहीं होगा।
हमें आज रात पलायन करना होगा
किसी दूसरे सुरक्षित जंगल की ओर।
सुना है
कल से यहां
मानवजनित मशीनें चीखेंगी
और
परसां
यहां श्मशान सी खामोशी होगी।
सुनते ही
पलायन शुरु हो गया
इस चेतावनी के साथ
ध्यान रखना
गलती से भी किसी
मानव आबादी की ओर मत जाना
वे डरने का नाटक करेंगे
और
मारकर हमें ही आदमखोर करार दे देंगे।
अलविदा दोस्तों...
संदीप कुमार शर्मा