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शनिवार, 15 अगस्त 2026

पलायन....

आज पक्षियों 

जीवों

वन्य जीवों

कीटों, तितलियों की

आपात बैठक बुलाई गई।

जंगल का राजा

थर-थर कांप रहा है

सभी को सामने देख।

बार-बार कई बार

हिचकी ले रहा है।

इस रात

जंगल खामोश है

राजा खामोश है

केवल इतना ही कह पाया

दोस्तों 

कल यह जंगल हमारा नहीं होगा।

माफ करना

किसी का नहीं होगा

अरे

जंगल ही नहीं होगा।

हमें आज रात पलायन करना होगा

किसी दूसरे सुरक्षित जंगल की ओर।

सुना है

कल से यहां 

मानवजनित मशीनें चीखेंगी

और 

परसां

यहां श्मशान सी खामोशी होगी।

सुनते ही 

पलायन शुरु हो गया

इस चेतावनी के साथ

ध्यान रखना 

गलती से भी किसी 

मानव आबादी की ओर मत जाना

वे डरने का नाटक करेंगे

और

मारकर हमें ही आदमखोर करार दे देंगे।

अलविदा दोस्तों...


संदीप कुमार शर्मा 


बुधवार, 18 जून 2025

तो जिंदगी आसान है

 जीने के लिए 

कोई खास हुनर नहीं चाहिए इस दौर में

केवल हर रोज

हर पल

हजार बार मर सकते हो ?

लाख बार धक्का खाकर

उस कतार से

बाहर और आखिरी तक पहुंचकर

दोबारा कतार का हिस्सा हो सकते हो ?

बिना शिकायत अंदर ही अंदर

रोते रहिए

चेहरे पर फिर भी मुस्कान बरकरार रख सकते हो ?

आगे चलते व्यक्ति को 

गलत साइड ओवरटेक कर 

चाहो तो 

दाखिल हो सकते हो

अमानवीयता के जंगल में यदि हां ?

तो जिंदगी आसान है

लेकिन 

यह न कहना

कि ये भी कोई जिंदगी है।

जिंदगी का अधिकांश भू भाग

इन्हीं तरह की कशमकश से भरा होता है। 


पलायन....

आज पक्षियों  जीवों वन्य जीवों कीटों, तितलियों की आपात बैठक बुलाई गई। जंगल का राजा थर-थर कांप रहा है सभी को सामने देख। बार-बार कई बार हिचकी ल...