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गुरुवार, 12 मार्च 2026

मन की कहेंगे

 



1.

हम छोटे हैं

बहुत छोटे

तब जानते हैं

जब हम बडे़ हो जाते हैं 

2.

जीने के लिए रोज

हम सीते हैं 

पूरा दिन अपने आप को

फिर 

उधड़ जाते हैं अगली सुबह। 

3.

एक कदम

दूसरा कदम

तीसरा कदम

चौथा भी

फिर कोई कदम नहीं। 

4.

पेड़ पर घोंसला

लटका रहा पूरे साल

पक्षी लौटा 

और 

टूट गई घोंसले वाली वो डाल।

5.

चीख अक्सर

भयभीत करती है

लेकिन

अंदर ही अंदर

हर बार कुछ टूटता है

बिना शोर के।


संदीप कुमार शर्मा



सोमवार, 16 जून 2025

जिंदगी कैसे कहें तुझसे कुछ मन की

जिंदगी बता तो सही

कैसे कहें तुझसे

कुछ मन की

कुछ बचपन की

कुछ जवानी की

कुछ उम्रदराज होने के पहले भयाक्रांत सच की।

हर हिस्सा

अपने अपने सच समेटे है

कोई किसी की सुनना नहीं चाहता 

केवल

अपनी सुनाना चाहता है

कौन है जो उम्र के इन हिस्सों की 

तसल्ली से बैठकर 

सुन ले...।

जिंदगी कोई शिकायत कहां है

हां

सवाल हैं

रहेंगे 

क्योंकि इस दौर में 

कोई और सुन भी कहां रहा है

हम अपनी 

और 

अपने मन भी

सुन नहीं पा रहे हैं

जिद है

सनक है

और

जिंदगी तुम हो...

निखालिस तुम...सवाल सी ?


मन की कहेंगे

  1. हम छोटे हैं बहुत छोटे तब जानते हैं जब हम बडे़ हो जाते हैं  2. जीने के लिए रोज हम सीते हैं  पूरा दिन अपने आप को फिर  उधड़ जाते हैं अगली स...